राणा सांगा का चरमोत्कर्ष

-1519 ई. से 1526 ई. का काल राणा सांगा की शक्ति का चरमोत्कर्ष काल माना जा सकता है। 1519 ई. में सांगा गागरोण के युद्ध में विजयी होकर मालवा के सुल्तान महमूद खलजी द्वितीय को बन्दी बनाकर चित्तौड़ ले आया था।1

इसके बाद तो निरन्तर उसकी शक्ति बढ़ती गयी। 1526 ई. में सांगा द्वारा दिल्ला सुल्तान इब्राहीम लोदी को पराजित करना उसकी शक्ति का मीत्कर्ष था। अब तक अनेक हिन्दू राजाओं और सरदारों ने उसके नेतृत्व को स्वीकार कर लिया था। कर्नल टॉड ने लिखा है कि 7 उच्च श्रेणी के राजा, 9 राव और 104 सरदार उसकी सेवा में उपस्थित रहते थे। वस्तुतः । सांगा ने अपने पड़ोसी राजपूत शासकों, मालवा और गुजरात के सुल्तानों तथा दिल्ली : इब्राहीम लोदी को पराजित करके अपने आपको राजपूत शासकों में श्रेष्ठ सिद्ध कर दिया था। अनेक हिन्दू शासक और सामान्य जनता उसे हिन्दू धर्म और संस्कृति का रक्षक समझने लगी थी। राजपूत शासकों और सरदारों को तो यह विश्वास होने लग गया था कि राणा उत्तर भारत में हिन्दू साम्राज्य की अवश्य स्थापना कर लेगा। इस प्रकार 1526 ई. तक सांगा की शक्ति और प्रतिष्ठा अपने चरम शिखर पर थी।

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