ईडर राज्य में हस्तक्षेप

मेवाड़ की गद्दी पर आसीन होने के कुछ ही वर्षों बाद सांगा को ईडर राज्य में अपने समर्थक को गद्दी पर बैठाने का अवसर मिल गया, जिसके लिए उसने ईडर राज्य में हस्तक्षेप किया। ईडर के राजा भान की मृत्यु के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र सूरजमल ईडर का शासक बना, किन्तु 18 महीनों के बाद ही उसकी मृत्यु हो गयी। ईडर का शासक बनाया गया, परन्तु कुछ दिनों बाद उसकी…

April 4, 2021
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सांगा का राज्यारोहण

सांगा का राज्यारोहण-जब सांगा अज्ञातवास में था तब उसे मेवाड़ की गद्दी प्राप्त होना असम्भव दिखाई दे रहा था। किन्तु परिस्थितियाँ धीरे-धीरे उसके अनुकूल होती गयीं। जैसा कि पूर्व में बताया गया है जयमल, राव सुरतान के हाथों मारा गया और सिरोही से लौटते समय रास्ते में, अपने बहनोई द्वारा दिये गये विषयुक्त लड्डू खाने से पृथ्वीराज की मृत्यु हो गयी। अपनी मृत्यु से पूर्व पृथ्वीराज ने सारंगदेव की भी…

April 4, 2021
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रायमल के पुत्रों में परस्पर विरोध

-राणा रायमल के 11 रानियाँ थीं जिनसे 13 पुत्र और 2 पुत्रियाँ हुई। पृथ्वीराज ज्येष्ठ पुत्र था और जयमल दूसरा पुत्र था तथा सांगा तीसरा पुत्र था। पृथ्वीराज और सांगा सगे भाई थे। रायमल अपने जीवनकाल में अपना उत्तराधिकारी निश्चित नहीं कर पाया था, जिससे उसके महत्त्वाकांक्षी पुत्र और चचेरे भाई एक-दूसरे के प्रति वैमनस्य रणने लगे। रायमल ने कुम्भलगढ़ की शासन व्यवस्था पृथ्वीराज को सौंप कर इस वैमनस्य में…

April 4, 2021
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प्रतिरोध की नीति : महाराणा सांगा

(The Policy of Resistance : Maharana Sanga) अपने पिता महाराणा कुम्भा की हत्या करके उदयसिंह (उदा) 1468 ई. में मेवाड़ की गद्दी पर बैठा। मेवाड़ के अधिकांश सामन्तों को पितृहन्ता उदा का गही पर बैठना पसन्द नहीं आया और उन्होंने कुम्भा के छोटे पुत्र रायमल को मेवाड़ की गही पर बैठाने का निश्चय का रायमल को चित्तौड़ आने का निमन्त्रण भेजा। इस समय रायमल अपनी ससुराल ईटर में सैन्य मेवाड़…

April 4, 2021
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अन्य महत्त्वपूर्ण दुर्ग

राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण दुर्गों में अचलगढ़, तारागढ़, सिवाणा और जालौर के दुर्ग उल्लेखनीय हैं। आबू पर्वत पर स्थित अचलगढ़ का दुर्ग तो इस समय बिल्कुल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था। दुर्ग की तलहटी में अचलेश्वर महादेव का मन्दिर है। मन्दिर के चारों ओर बुर्जदार परकोटा बना हुआ है। तारागढ़ का दुर्ग, अजमेर नगर के पास बीठरी पहाड़ी पर स्थित है। जनश्रुति के अनुसार…

April 4, 2021
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जोधपुर का किला (मेहरानगढ़)

हिन्दू और मुस्लिम स्थापत्य शैलियों का मिला- जुला रूप है। डॉ. जगदीशसिंह गहलोत के अनुसार, “किले की इमारतें ऊँची और सुन्दर बढ़िया खुदाई के काम को, लाल पत्थर की जालियों से सुशोभित हैं।” जालियों के फलस्वरूप इमारतों में पर्याप्त प्रकाश रहता है। कई महलों की दीवारों और छतों पर कलात्मक चित्रकारी की छटा देखने को मिलती है। महलों में मोतीमहल, फूलमहल और फतहमहल अधिक आकर्षक हैं। मोतीमहल का निर्माण महाराजा…

April 4, 2021
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मेहरानगढ़ (जोधपुर)

मेहरानगढ़ (जोधपुर)- मारवाड़ के राठौड़ों की नई राजधानी जोधपुर का म नी मेहरानगढ़ दुर्ग राव जोधा ने बनवाया था। पुरानी राजधानी मण्डौर के किले को शत्रुओं की चढ़ाइयों से बेकार देख राव जोधा ने मण्डौर से 6 मील दक्षिण में चिड़ियानाथ की ट्रॅक नामक का एक पृथक् पहाड़ी पर ज्येष्ठ सुदी 11, वि, 1516, शनिवार (12 मई, 1459 ई.) से नया सुदृढ़ किला बनवाना प्रारम्भ किया। इस किले की नींव…

April 4, 2021
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चौहान पृथ्वीराज तृतीय (Chowhan Prithvi Raj-III)

647 ई. में हर्षवर्धन की मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु को लेकर 1200 ई. तक का कुछ भारतीय इतिहास में विशेष महत्त्व रखता है। इस काल में उत्तर, दक्षिण और सुदूर दक्षिण अनेक शक्तिशाली राजवंशों का उत्कर्ष और पराभव हुआ। ऐसे राजवंशों में चौहानों का स्थान काफी महत्त्वपूर्ण है। चौहानों ने राजस्थान तथा उसके आस-पास के क्षेत्रों में अपने कई शासन केन्द्र स्थापित कर लिये थे, जिनमें सांभर (शाकम्भरी) अथवा…

April 2, 2021
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मिहिरभोज

मागील नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज को जीतकर गुर्जर-प्रतिहारों के वर्चस्व को पुनः प्रतिष्ठित किया। चूँकि चक्रायुध बंगाल के धर्मपाल का आश्रित राजा था अतः धर्मपाल ने नागभट्ट द्वितीय पर आक्रमण कर दिया। परन्तु घमासान युद्ध में उसे नागभट्ट द्वितीय के हाथों पराजित होकर बंगाल लौटना पड़ा। नागभट्ट द्वितीय के बाद उसका पुत्र रामचन्द्र या रामभद्र 832 ई. में कन्नौज के सिंहासन पर बैठा। उसने केवल तीन वर्ष तक राज्य किया…

April 2, 2021
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उज्जैन और कन्नौज के गुर्जर-प्रतिहार

पूर्वज प्रतिहारों ने मण्डौर से अपना राज्य विस्तार शुरू किया था और उनका हरिशचन्द्र नामक ब्राह्मण था। सम्भव है कि हरिशचन्द्र के समय से ही उसके वंशजों ने अपनी सुविधानुसार राजस्थान, गुजरात, मालवा, कनौज आदि क्षेत्रों में बसना शुरू कर दिया था और जब अवसर मिला अपने राज्य भी स्थापित करते चले गये। डॉ. ओझा का मत है कि इन प्रतिहारों ने सर्वप्रथा चावड़ा राजपूतों से भीनमान का राज्य अधिकृत…

April 2, 2021
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