ईडर राज्य में हस्तक्षेप

मेवाड़ की गद्दी पर आसीन होने के कुछ ही वर्षों बाद सांगा को ईडर राज्य में अपने समर्थक को गद्दी पर बैठाने का अवसर मिल गया, जिसके लिए उसने ईडर राज्य में हस्तक्षेप किया। ईडर के राजा भान की मृत्यु के बाद उसका ज्येष्ठ पुत्र सूरजमल ईडर का शासक बना, किन्तु 18 महीनों के बाद ही उसकी मृत्यु हो गयी। ईडर का शासक बनाया गया, परन्तु कुछ दिनों बाद उसकी भी मृत्यु हो गयी। अत: भीम के सूरजमल का पुत्र रायमल इस समय अल्पवयस्क था। अतः सूरजमल के छोटे भाई भीम का पुत्र भारमल को ईडर की गद्दी पर बैठाया गया। इस समय तक सूरजमल का पुत्र रायमल वयस्क हो चुका था, अत: उसने भारमल की गद्दीनशीनी को चुनौती दी। फलस्वरूप दोनों में उत्तराधिकार का संघर्ष आरम्भ हो गया। रायमल ने सांगा की शरण ली और सहायता के लिए प्रार्थना की। इस पर सांगा ने ईडर पर आक्रमण किया और भारमल को परास्त कर रायमल को ईडर की गद्दी पर बैठाया तथा स्वयं मेवाड़ लौट आया। 1515 ई. में भारमल ने गुजरात के मुजफ्फरशाह से सहायता की याचना की। मुजफ्फरशाह ने अहमदनगर के निजाम-उल-मुल्क को, जो सुल्तान का एक प्रमुख अमीर था, भारमल की सहायता करने को कहा। निजाम- उल-मुल्क ने ईडर पर आक्रमण कर रायमल को वहाँ से खदेड़ दिया और भारमल को ईडर का सिंहासन सौंप दिया। इस अवसर पर सांगा, रायमल को कोई सहायता नहीं दे सका। रायमल ने भागकर पहाड़ों में शरण ली और अपने शत्रु के विरुद्ध छापामार युद्ध करता रहा।

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